आफताब..।।
बदालो को चीरती उस डूबते आफताब की किरणे,
गिर कर भी पार निकल जाने का एहसास है
उसके नूर से रोशन ये जहां,
मानो पोहोच का एहसास है
उसका मद्धम मद्धम सुनहरा होता रंग,
फलक का हल्के से गुलाबी होजाना,
और जाने के बाद तक भी नूर क़ायम रख पाना;
फतेह का एहसास है
और फतेह हासिल की जाती है;
बिल्कुल उसकी की तरह,
अपने आप की आग में जल कर...
बिल्कुल उसकी की तरह,
खुद से उभर कर..।।
-Lubaina surury
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