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Showing posts from February, 2020

BECOMING...!

Smile wider than you smiled Laugh louder than you laughed Care a little less... Create a new draft! Sleep under the stars, Wake up to the sun... Breathe a little more... Trust me, it'd be fun! Wave ur hands higher... Flaunt ur hairs dry-er Speak a little more.. Just don't get shy-er! Look around more.. Observe & explore.. Give it a break, Wait at shores... Take it in..get ashore!  Drive a bit slower... Write a bit lower.. Hold on... Its okay to hover!  Cut off toxins.. Bloom up glossy Let the rain fall.. Be a little sloppy... Grow from the ground, Be a bit floppy! Smile wider than you smiled Laugh louder than you laughed Care a little less... Create a new draft!             -Lubaina surury

आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै.....l

आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै... यूहीं तेरी रोशनी में घुल रही हूं मै... आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै... तेरी निगाहों को ढूंढ रही हूं अपनी निगाहों से, तेरे दामन को छू रही हु बहती फिज़ाओं से, यूंही तेरे आगोश में रह रही हूं मै... आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै... सितारों से घिरा देख रही हूं तुझे, उनके साथ टेहेलता रही हु तुझे.. यूंही तेरे साथ टेहेल रही हूं मै.. आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै... तेरे नूर को जैसे सोख रही है मै, तेरे आकार को अल्फाजों में बुन रही हूं मै, तेरी मोहब्बत को जी रही हूं मै, तेरे बिखरते लिबास में बस रही है मै... यूहीं तेरे साथ मिल रही हूं मै.. आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै...।।             -Lubaina surury

गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम..।

सर्द की बरसात हो तुम, गुलाम नहीं... आज़ाद हो तुम पंख भले ही ना दिखे, उड़ान भरने की आस हो तुम जिस्म की रूह का ताज हो तुम, गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम बादलों की प्यास हो तुम बहती नदी का राग हो तुम, खुद के खोए खयालों की राह हो तुम, गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम फिज़ाओं की महक हो तुम, नन्हे पंछियों की चेहेक हो तुम, खिलते गुल का आगाज़ हो तुम, गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम ख्वाबों का एहसास हो तुम, बंजर ज़मीन की सांस हो तुम, पल पल का जज़्बात हो तुम, गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम खो जाओ कभी तो बैराग हो तुम, खुदकी कश्मकश का राज़ हो तुम, उलझी सही...खुद का नाज़ हो तुम, हां...खुद से ही के रही हूं  की बेखबर ता अनजान ना रेह जाना  क्युकी सर्द की बरसात हो तुम, गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम..।।               -Lubaina surury