आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै.....l

आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै...
यूहीं तेरी रोशनी में घुल रही हूं मै...

आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै...

तेरी निगाहों को ढूंढ रही हूं अपनी निगाहों से,
तेरे दामन को छू रही हु बहती फिज़ाओं से,
यूंही तेरे आगोश में रह रही हूं मै...
आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै...

सितारों से घिरा देख रही हूं तुझे,
उनके साथ टेहेलता रही हु तुझे..
यूंही तेरे साथ टेहेल रही हूं मै..
आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै...

तेरे नूर को जैसे सोख रही है मै,
तेरे आकार को अल्फाजों में बुन रही हूं मै,
तेरी मोहब्बत को जी रही हूं मै,
तेरे बिखरते लिबास में बस रही है मै...
यूहीं तेरे साथ मिल रही हूं मै..
आज फिर तेरे साथ खिल रही हूं मै...।।
            -Lubaina surury



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