गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम..।

सर्द की बरसात हो तुम,
गुलाम नहीं... आज़ाद हो तुम

पंख भले ही ना दिखे,
उड़ान भरने की आस हो तुम
जिस्म की रूह का ताज हो तुम,
गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम

बादलों की प्यास हो तुम
बहती नदी का राग हो तुम,
खुद के खोए खयालों की राह हो तुम,
गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम

फिज़ाओं की महक हो तुम,
नन्हे पंछियों की चेहेक हो तुम,
खिलते गुल का आगाज़ हो तुम,
गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम

ख्वाबों का एहसास हो तुम,
बंजर ज़मीन की सांस हो तुम,
पल पल का जज़्बात हो तुम,
गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम

खो जाओ कभी तो बैराग हो तुम,
खुदकी कश्मकश का राज़ हो तुम,
उलझी सही...खुद का नाज़ हो तुम,
हां...खुद से ही के रही हूं 
की बेखबर ता अनजान ना रेह जाना 

क्युकी सर्द की बरसात हो तुम,
गुलाम नहीं...आज़ाद हो तुम..।।
              -Lubaina surury

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