मै खो जाना चाहती हूं...।
मैं खो जाना चाहती हु
थोड़ा खुद में...थोड़ा इस बारिश में
घुल जाना चाहती हु..
मैं खो जाना चाहती हु
खुद के खयालो की भूल-भुलैया में
कुछ रास्ते कुछ जवाब खोजना चाहती हु...
मैं खो जाना चहती हु
इस खुबसूरत सांझ में
और बटोर लेना चाहती है ये बिखरती रोशनी
सोख लेना चहतीहु सारी खुशिया
जैसे फलक इस रौशनी को सोख लिया करता है...
मैं खो जाना चाहती हु
इसलिए नही की कोई ढूंढे मुझे
इसलिए की खुद को ढूंढ लू...
.....ये सफर अब तक शुरू भी नही किया है,
और कदम जैसे काप से रहे है...
आगे बढ़ना चाहतई हु,
पर ये सवाल...जैसे शक छाप रहे है..
मैं खो जाना चहतीहु इन्ही सवालो में
क्योंकि शायद जवाब यही छुपे है...
मैं खो जाना चाहती हु...
क्योंकि मेरे खयाल अक्सर कुछ खोजते हुए अपनी सोच बुनते है...
मैं खो जाना चाहती हु...।।
-Lubaina surury
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